आनंदपाल और लॉरेंस गैंग की लड़ाई में मारे गए गोगामेड़ी:गोदारा ने जब कारोबारी को धमकाया तो फिरौती देने से किया था मना
हत्यारों के इस जत्थे में एक 6 फुट लंबा दढ़ियल नौजवान भी है. सबसे पहले वो अपनी 9 एमएम पिस्तौल का ट्रिगर खींचता है. बैरल से धुआं उगलती गोली सामने बैठे एक हट्टे-हट्टे आदमी के सीने की तरफ बढ़ने लगती है. गोली इस आदमी का सीना छलनी करे उससे पहले, हम समय को रोकते हैं और अतीत में तेज़ी से लौटते हैं.
साल 1992 में. देश में राम मंदिर आंदोलन का वक़्त. नागौर की लाडनूं तहसील के गांव सांवराद में एक नौजवान की शादी होने जा रही है. गांव के लोग लड़के को पप्पू कहकर बुलाते हैं. वो रावणा राजपूत बिरादरी से है. इससे जुड़ा मिथक है कि सामंती काल में राजपूत पुरुष और गैर-राजपूत महिला की संतान को इस बिरादरी में रखा जाता था. राजपूतों में इस बिरादरी के प्रति एक हिकारत का भाव भी है. चूंकि पप्पू "प्योर" राजपूत नहीं है इसलिए बारात निकलने से पहले ही गांव के "असली" राजपूतों ने चेतावनी दे रखी है - कि अगर दूल्हा घोड़ी पर चढ़ा तो अंजाम ठीक नहीं होगा, 'क्योंकि घोड़ी सिर्फ "प्योर" राजपूत ही चढ़ता है.'
पप्पू ने इस नाज़ुक मौके पर अपने एक दोस्त को याद किया. नाम - जीवनराम गोदारा. गोदारा उस समय डीडवाना के बांगड़ कॉलेज में छात्र नेता हुआ करता था. गोदारा खुद बारात में पहुंचा और अपने रसूख़ का इस्तेमाल कर पप्पू को घोड़ी पर चढ़ाया और बड़ी शान से बारात निकाली. राजपूतों का ऐतराज अपनी जगह रह गया. इसके बाद दोनों की दोस्ती और गाढ़ी हो गई.
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